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उत्तराखंड में पेपर लीक का मास्टरमाइंड फिर गिरफ्तार

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उत्तराखंड में पेपर लीक का मास्टरमाइंड फिर गिरफ्तार

उत्तराखंड में पेपर लीक का मास्टरमाइंड फिर गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका हाकम सिंह रावत एक बार फिर कानून के शिकंजे में आ गया है। इस बार उसकी गिरफ्तारी उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं उपाय) अध्यादेश 2023 के तहत हुई है, जो नकल और पेपर लीक से जुड़े मामलों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है। इस कानून के तहत दोषियों को आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने की सजा दी जा सकती है।

15-15 लाख में पास कराने का था सौदा

UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा से ठीक एक दिन पहले, उत्तराखंड एसटीएफ और देहरादून पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में हाकम सिंह और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। आईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि गिरोह आगामी परीक्षा में नकल कराने के लिए 6 अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये मांग रहा था। जैसे ही इस सूचना की पुष्टि हुई, एसटीएफ और पुलिस ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया।

पहले भी जा चुका पेपर लीक मामले में जेल

हाकम सिंह इससे पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों में जेल जा चुका है। जुलाई 2022 में पेपर लीक कांड के बाद प्रदेशभर में हड़कंप मच गया था। जांच में सामने आया कि हाकम और उसके नेटवर्क ने वर्षों से विभिन्न परीक्षाओं को प्रभावित किया था।

एसएसपी नवनीत भुल्लर और देहरादून एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, आरोपी यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा पास कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से 12 से 15 लाख रुपये वसूलने की फिराक में था। योजना यह थी कि अगर अभ्यर्थी पास हो जाते तो पैसे हड़प लिए जाते और यदि असफल होते तो अगली परीक्षा में “एडजस्टमेंट” के नाम पर दोबारा ठगा जाता।

2022 में खुला था हाकम का काला चिट्ठा

जुलाई 2022 में जब एक के बाद एक परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, तो पूरे प्रदेश में युवाओं में आक्रोश फैल गया। सबसे पहले पांच दिसंबर 2021 को हुई स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा, 16 से 21 जुलाई 2021 को हुई वन दरोगा भर्ती, और 26 सितंबर 2021 को सचिवालय रक्षक भर्ती रद्द की गईं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वाहन चालक, अनुदेशक, कर्मशाला अनुदेशक, मत्स्य निरीक्षक, मुख्य आरक्षी पुलिस दूरसंचार, और पुलिस रैंकर्स भर्ती परीक्षा भी रद्द करनी पड़ी।

हाकम ने न केवल ऑफलाइन परीक्षाओं के पेपर प्रिंटिंग प्रेस से लीक कराए, बल्कि ऑनलाइन परीक्षाओं में भी सेंधमारी की। वन दरोगा की भर्ती परीक्षा में 83 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन पेपर लीक होने के बाद आयोग को ऑनलाइन परीक्षा पद्धति पर से भरोसा उठ गया और इसके बाद कोई भी भर्ती ऑनलाइन नहीं कराई गई।

नए कानून में अब बचाव नहीं

पहले नकल और पेपर लीक के मामलों में कानूनी प्रावधान सीमित थे, जिसके चलते हाकम सिंह जैसे अपराधी सुप्रीम कोर्ट से 13 महीने में जमानत लेकर बाहर आ गए थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 2023 में लागू किए गए नए अध्यादेश के तहत यदि कोई व्यक्ति, चाहे वह परीक्षा केंद्र का कर्मचारी हो, कोचिंग संस्थान, प्रिंटिंग प्रेस, या कोई बाहरी एजेंट, यदि नकल या पेपर लीक में लिप्त पाया जाता है तो उसे आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। यह अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और अशमनीय घोषित किया गया है।

सवाल यही, क्या सजा तक पहुंचेगा ये मामला

उत्तराखंड सरकार ने नकल और भर्ती घोटालों पर नकेल कसने का जो वादा किया था, वह अब कानून और कड़ी कार्रवाई के ज़रिए धरातल पर उतरता दिख रहा है। हाकम सिंह जैसे नकल माफिया की गिरफ्तारी न केवल युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अब परीक्षा प्रणाली के साथ कोई समझौता नहीं होगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या हाकम सिंह पूर्व की तरह इस बार भी अपने रसूख का इस्तेमाल कर सजा से बच पाएगा, या नकलरोधी कानून के तहत उसे कड़ी सजा मिलेगी।

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